मुंबई से सटे पालघर में व्यक्तियों यानी कि दो साधु और एक ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई क्या यह इंसानियत है क्या यही हिंदुत्व है एक छोटी सी अफवाह के कारण इतना बड़ा फैसला लेना इस बात पर जरा भी गौर ना करना की जो उनके कानों में बात पड़ी है या झूठी भी हो सकती है क्या यह सही है जी नहीं बिल्कुल नहीं एक जिम्मेवार व्यक्ति को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि वह किस बात के लिए किसी को पीट-पीटकर मार रहा है यहां कहा जा रहा है कि लोगों में अफवाह फैल गई थी कि कुछ लोग बच्चों की किडनी या चुराने के लिए घूम रहे हैं तो जब पूरी भीड़ साधुओं पर टूट पड़ी थी तो क्या इनमें से एक भी व्यक्ति इतना समझदार नहीं था कि वह यह कह सके कि यह अफवाह की हो सकती है यह वह साधुओं को बता सके या सभी के सभी मूर्ख थे,

यह सारा वाकिया हुआ लगभग घंटों तक यह ड्रामा चलता रहा साधु पीटते रहे लोग पीटते रहे भीड़ तमाशा देखती रही बच्चे वीडियो बनाते रहे और बीच में कुछ दयावान कह रहे थे कि बस करो मत मारो,

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अगर आप इस कहानी के बारे में कुछ नहीं जानते हैं तो आपको बता दें कि पिछले 17 तारीख को मुंबई से सटे पालघाट में मोबलीचिंग का मामला सामने आया है मोबलीचिंग का अर्थ है कि भीड़ के द्वारा किसी पर हमला करके पीट-पीटकर मार देना और यह मोबलीचिंग का मामला भी बहुत अटपटा है यहां एक 70 साल के साधु की हत्या की गई है यहां कुल मिलाकर दो साधु और एक उनके ड्राइवर की भी हत्या हुई है यह सोचने योग्य और ध्यान देने योग्य यह बात है कि बुजुर्ग साधु की उम्र 70 साल से भी ऊपर थी तो क्या उन्हें पीट-पीटकर मारना जरूरी था क्या भेजने ताकतवर थे कि भीड़ उन्हें दबोच में नहीं सकती थी और डायरेक्ट डंडों से पीटना शुरू कर दिया पुलिस भी तो साथ में थी तो क्यों पुलिस ने उन्हें नहीं बताया आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुलिस वालों का कहना है कि वह खुद जान बचाकर भागे थे,

इस मर्मम दृश्य का वीडियो देखकर ह्रदय कांप जाता है आप इस वीडियो में स्पष्ट देख सकते हैं कि किस तरह से भीड़ बुजुर्गों को बुरी तरह डंडों से पीट रही है क्या इन 200 300 लोगों में से एक भी ऐसा नहीं था जो बीच में आकर इन बुजुर्गों की मदद कर सके और इन्हें बचा सके आखिर क्या गुनाह था इनका जो इन्हें इतनी बदतर मौत मिली,


साधुओं की हत्या कांड की सच्चाई क्या है ? 


तो दोस्तों सच्चाई यह जहां तक बात आती है तो फिलहाल हम कुछ नहीं कह सकते क्योंकि फिलहाल हर एक मामले में दो राय आती है कुछ लोग कुछ बता रहे हैं मीडिया कुछ बता रही है जब तक इस मामले को जड़ तक नहीं खोज लिया जाता तब तक इसके विषय में कुछ भी स्पष्ट कहना संभव नहीं है लेकिन हम आपको कुछ ऐसी बातें बता सकते हैं जो कि शायद आपको कहीं और देखने को नहीं मिलेगी

पुलिस की जहां तक बात है तो हम आपको बता दें कि कई ऐसी वीडियोस भी हमारे सामने देखने को आई है जिनमें की साफ तौर पर नजर आ रहा है कि पुलिस वाला खुद साधु को लोगों के बीच में धकेल रहा है शायद यहां ऐसा भी हो सकता है कि पुलिस वाला भी साधु के साथ ना इतना चाहता हो यानी की भीड़ बहुत खतरनाक हो और लोग जान देने को उतारू हो इस वजह से पुलिस वाले की मजबूरी हो सकती है कि वह साधु को भीड़ में धक्का दे तो क्या ऐसे पुलिस वालों से हमारी रक्षा हो सकती है या क्या हमें खाकी वर्दी को देखकर सुरक्षित महसूस करना चाहिए,

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संतों की हत्या के पीछे ‘धर्मांतरण’ के ठेकेदार ?

दोस्तों अगर ऐसा मामला कभी भी सामने आता है तो पुलिस और सरकार का सबसे पहले फर्ज होता है कि गुनहगारों को पकड़ा जाए यानी की जांच शुरू की जाए लेकिन महाराष्ट्र में देखने को मिला कि जैसे ही 3 लोगों की हत्या हुई कुछ महा अनुभवी नेता लोग कह रहे हैं कि मारने वाले मुसलमान नहीं थे अरे तो भाई यह किसने कहा कि मारने वाले मुसलमान थे यहां हिंदू मुस्लिम की तो कोई बात ही नहीं आई मामला तो यही है कि दो संतों और एक उनके ड्राइवर की हत्या की गई है जल्द से जल्द उन लोगों को सामने लाओ जिसने हत्या की है याद इसने गलत अफवाह फैलाई है लेकिन नहीं सरकार इसको धर्म से जोड़कर देख रही है,

संतों की हत्या को धर्म से जोड़ कर देखना कहां तक ठीक है यह आप भी जानते हैं और हम भी भली-भांति जानते हैं,

मुंबई के पुलिस कमिश्नर और पालघर इलाके में आईजी रह चुके डॉ सत्यपाल सिंह ने ट्वीट कर कुछ जानकारी दी जिसे आप नीचे स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं,

यहां एक बात और सामने आ रही है सूत्रों के हवाले से आपको बता दें कि कुछ लोग कह रहे हैं कि ग्रामीणों को भड़काने वाला एक मुस्लिम व्यक्ति है जिसने यह कहा था कि मुस्लिम समुदाय के लोग हिंदू बनकर रात में कोरोनावायरस फैलाएंगे हो सकता है कि यह बात भी सच हो इसीलिए ग्रामीणों ने साधुओं को पीटा हो,
यह सच भी हो सकता है, हो सकता है यह एक प्रकार से जेहाद का हिस्सा हो आपने देखा होगा कि दिल्ली में किस तरह से जमातियों  ने पुलिस के ऊपर थूका और कोरोनावायरस फैलाने की कोशिश की,

हो सकता है उस बात का सहारा लेकर मुस**नों ने यह अफवाह फैला दी हो कि रात को मु**मान हिंदू बाबाओं का भेष बनाकर उनके गावँ में आएंगे,
आपने देखा होगा कि यह कौम जेहाद के नाम पर कुछ भी कर सकती है क्योंकि ऐसे कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं जिसमें अक्सर इस जाहिल कौम का ही नाम आता है,
चाहे कुछ भी हो एक दिन अंदर की बात सबके सामने आ जाएगी कि आखिर सच्चाई क्या है,

अगर इस बार भी इस कांड में इन लोगों का हाथ मिला तो यह बिल्कुल भी सहन नहीं किया जाएगा क्योंकि हिन्दुत्व कोई मजाक नहीं है, हो ना हो हिंदुत्व को मिटाने की कोशिश है, 

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जय हिंद जय भारत 
रामराज

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