दोस्तों कोरोनावायरस के चलते पूरी दुनिया में मंदिर मस्जिद गिरजाघर यहां तक कि लोगों के खुद के घर भी बंद पड़े हैं लेकिन पाकिस्तानियों को फिर भी नमाज की पड़ी है,

वैसे तो करो ना वायरस पूरी दुनिया पर ही हावी है लेकिन पाकिस्तान में सुख सुविधाओं की कमी होने की वजह से और डॉक्टरी इलाज वक्त पर ना मिल पाने की वजह से कोरोना वायरस ने बहुत ज्यादा कहर ढाया हुआ है पाकिस्तान में करो ना वायरस अभी काबू के बाहर है लेकिन पाकिस्तानियों को फिर भी नमाज की पड़ी है,


दोस्तों पाकिस्तान में भी एक नाम मात्र का लॉकडाउन लगाया गया है आपको भी पता है कि पाकिस्तान की सरकार, जनता और मीडिया की आपस में कभी नहीं बनी तो यह लॉकडाउन तो सिर्फ नाममात्र का ही है क्योंकि पाकिस्तान की जनता पर सरकार का काबू ही नहीं है क्योंकि सरकार खुद पाकिस्तान की मिलिट्री के काबू में है?

दोस्तों पाकिस्तान ने परसों इसी लोग डाउन में कुछ चेंजेज किए थे जिनमें से एक बदलाव यह था कि अब पाकिस्तान में लोग मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ पाएंगे जब पूरी दुनिया ने मंदिर मस्जिद बंद किए हुए हैं तो क्या पाकिस्तान कुछ दिनों के लिए अपने घरों में ही नमाज नहीं पढ़ सकता,

दोस्तों भगवान तो सबके लिए बराबर ही होते हैं और भगवान कभी भी यह नहीं चाहते कि “लोग चाहे मरे पर उनकी पूजा करें”


दोस्तों जब कोई व्यक्ति खासता है तो उसकी खासी से निकला खराब पदार्थ 13 फीट की दूरी तय कर सकता है लेकिन पाकिस्तान ने यह नियम बनाया है कि जो भी मस्जिद में जाकर नमाज पड़ेगा उसे एक दूसरे से 6 फुट की दूरी बनाकर रखनी होगी तो क्या पाकिस्तान के लोग 6 फुट की दूरी में ही सुरक्षित है,

दोस्तों करो ना वायरस एक प्रकार का नया वायरस है यह आज से पहले कभी भी सामने नहीं आया था यह नया वायरस है इसलिए इसकी अभी तक कोई दवा भी नहीं बनी है यानी कि इस वायरस का कोई तोड़ नहीं है जब इस वायरस का कोई तोड़ नहीं है इसकी कोई दवा नहीं बनी है तो इसको हल्के में भी नहीं लेना चाहिए और इसको लेकर किसी भी प्रकार का अंदाजा लगाना खतरे से खाली नहीं है लेकिन पाकिस्तान सरकार खुद ही इस वर्ष को हल्के में लहरें ले रही है और पहले तो उन्होंने लुक डाउन इतना लेट लगाया दूसरा अभी कुछ ही समय के लोग रावण के अंदर ही इतनी ज्यादा छूट मिल रही है यह बिल्कुल भी सही नहीं है और पाकिस्तान की इकोनॉमी भी इतनी स्ट्रांग नहीं है कि वह आगे चलकर वायरस को फैलने से रोक सके पाकिस्तान के लिए तो वायरस अभी से बेकाबू हो चुका है,


पाकिस्तानी मीडिया का क्या कहना है?


दोस्तों पाक मीडिया के बारे में तो आप भली-भांति ही जानते होंगे कि पाक मीडिया किस तरह से हमेशा सवालों को गहरे रखता है और खुद भी सवालों के घेरे में आता रहता है फिलहाल पाक मीडिया एक नौटंकी बनकर ही रह गया है क्योंकि सभी देशों के मीडिया एंकर इस बात पर डिबेट कर रहे हैं कि करो ना बरस कि महामारी जाने के बाद उनके देश के हालात क्या होंगे और उनकी इकोनामी का क्या होगा जनता को क्या करना चाहिए और सरकार को क्या करना चाहिए,

पाक मीडिया अपने ही लोगों को बस दुआएं देते हुए उन्हें जाहिल लोगों का दर्जा दे रहा है, पाकिस्तान की मीडिया एंकर्ज को यह पता ही नहीं है कि उन्हें क्या कहना चाहिए वह बस भांग रगड़ कर पीते हैं अपनी हॉट सीट पर बैठते हैं और डिबेट में विवादित बयान करके जाते रहते हैं,

हिलाली साहब कह रहे हैं कि पाकिस्तान के लोगों में डिसिप्लिन नाम की कोई चीज ही नहीं है इनको आपने पूरी उम्र में कभी लाइनें बनाते हुए देखा है जो यह अब आपके 6 फोटो वाले कानून को मानेंगे,


हिलाली साहब इस 6 फुट वाले मामले पर बहुत ज्यादा गुस्सा हुए हैं उन्होंने साफ-साफ कह दिया है कि इस वायरस को हल्के में लेना ठीक नहीं है और जहां तक बात है मस्जिदों में नमाज पढ़ने की तो वह बिल्कुल भी हद से बाहर वाली बात है हमें यह बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए यहां लोग मरे जा रहे हैं और नमाजियों को नमाज पढ़नी है कमाल की बात है,

मीडिया एंकर ने हिलाली साहब से कहा :- जब लोग राशन की दुकानों पर जाते हैं डॉक्टरों के पास आते हैं तब भी तो उन्हें पास पास खड़ा होना पड़ता है है तो एक मस्जिद के खोलने पर आप इतना गुस्सा क्यों है, 


हिलाली साहब का जवाब आया :- खाना लेने तो आपको जाना ही पड़ेगा डॉक्टर के पास भी आपको जाना पड़ेगा आप नहीं जाएंगे तो आप मर जाएंगे लेकिन अगर आप नमाज घर में पढ़ेंगे तो आप नहीं मरेंगे

मीडिया एंकर ने हिलाली साहब से कहा :- क्या आपको सरकार का फैसला सही लगता है, क्या कहना चाहेंगे आप इस फैसले पर

हिलाली साहब का जवाब आया :- बहुत ही अफसोस आ रहा है मुझे की यह किस किसम की हुकूमत है, इसमें कोई सेंस आफ रिस्पांसिबिलिटी नहीं है, पूरी दुनिया के मस्जिदों में नमाज नहीं पढ़ा जा रहा है यहां तक कि मक्का भी बंद है, जिसके डॉक्टर खिलाफ है जिसके सभी इकोनॉमिस्ट खिलाफ है जो कि पूरी इकोनामी को बता सकता है आप उन सब के खिलाफ जाकर यह कानून यह नियम बना रहे हैं,
यह जो लोग हैं जिन्हें डिसिप्लिन नाम की चीज नहीं है सड़कों पर खुलेआम बगैर मास्क के घूमते हैं पीछे आपने देखा था कि किस तरह से एक साथ खड़े थे खड़े नहीं थी एक दूसरे के ऊपर पड़े थे क्या आपको लगता है कि यह लोग इस बात को अब्सोर्ब कर पाएंगे, 

हिलाली साहब ने तो यह तक कह दिया कि मुझे तो लगता है कि कत्लेआम होने वाला है

दोस्तों आप इस पूरे माहौल की वीडियो हमारे यूट्यूब चैनल डिजिटल रेजीमेंट्स इंडिया पर देख सकते हैं

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